Komalta Ki Prakashtha Mahatma Buddha कोमलता की पराकाष्ठा 1. जिस रात को बुद्ध का परिनिर्वाण हुआ, आधी रात के समय सुभद्र नाम का एक परिव्राजक आया। उसके मन में कुछ शंकाएं थीं। आनंद ने उसे यह कहकर रोक दिया, “उन्हें हैरान मत करो। वह थके हुए हैं।“ भगवान ने आनंद की बात सुन ली। उन्होंने आनंद से कहा, “नहीं आनंद, सुभद्र को मना मत करो। मेरे पास आने दो। वह परमज्ञान की इच्छा से पूछना चाहता है, हैरान करने की उसकी इच्छा नहीं है। पूछने पर जो मैं उसे कहूंगा, वह उसे जल्दी ही समझ लेगा।” मध्यरात्रि में, उस अवस्था में, सुभद्र की तथागत से उपदेश सुनने का सौभाग्य मिल गया। एक बड़ी दुखियारी स्त्री थी। पति, पुत्र परिवार सब उसका नष्ट हो गया था। मारे दु:ख के वह पागल हुई फिरती थी। कपड़े पहनने का भी उसे होश न था। उसका नाम पटाचारा था। एक दिन घूमते हुए वह बुद्ध के पास, जैतवन आराम में, आ गई। उस नंगी स्त्री को देखकर लोगों ने कहा, यह पागल है। इसे इधर मत आने दो।” बुद्ध ने कहा, “ इसे मत रोको।” जैसे ही वह पास आई, बुद्ध ने कहा, “भगिनि, स्मृति लाभ कर ।” स्त्री को कुछ होश आया। लोगों ने उस पर कपड़े डाल दिये, जिन्हें उसने ओढ़ लिया...
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